अदालत का बिल्डर को राहत देने से इंकार

27 December, 2013 11:34 PM

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बंबई उच्च न्यायालय ने यह कहते हुये एक बिल्डर को कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है किनौसेना प्रतिष्ठान के निकट किसी भी निर्माण के संबंध में रक्षा मंत्रालय की नीतियों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती.

बिल्डर ने मध्य मुंबई में अपनी परियोजनाओं को अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं देने के रक्षा मंत्रालय के फैसले को चुनौती दी थी.

न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति आर वाई गन्नू की पीठ एसएसवी डेवलपर्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इसमें रक्षा मंत्रालय के एक मार्च 2012 के पत्र को चुनौती दी गई थी.

पत्र में वर्ली में छह झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) भवन के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र :एनओसी: देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ता को कोई राहत देने से इंकार कर दिया और 23 दिसंबर को याचिका खारिज कर दी.

अदालत ने कहा, ‘‘रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का उद्देश्य रक्षा बलों की सुरक्षा चिंताओं और जनता के अपनी भूमि पर निर्माण गतिविधियां चलाने के बीच संतुलन कायम करना है. नीतिगत फैसलों में हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते और उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.’’

याचिकाकर्ता के अनुसार महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग और एसआरए ने 2006 में निर्माण की अनुमति दी थी.

हालांकि, मार्च 2011 में आईएनएस ट्राटा के कमांडिंग ऑफिसर ने सरकार और एसआरए को एक पत्र लिखकर शिकायत की कि याचिकाकर्ता के भवनों का निर्माण नौसेना अधिकारियों से एनओसी लिए बिना किया जा रहा है.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार भूखंड पर बनाए जा रहे भवनों में से एक और 5342 वर्ग मीटर का भूखंड नौसेना प्रतिष्ठान के करीब है और इसलिए सुरक्षा का सवाल उठता है.

रक्षा मंत्रालय के पत्र के मद्देनजर एसआरए ने याचिकाकर्ता को निर्माण का काम रोकने का निर्देश दिया. याचिकाकर्ता ने इसके बाद रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया और उससे अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का अनुरोध किया.

मार्च 2012 में रक्षा मंत्रालय ने याचिकाकर्ता को सूचित किया कि सुरक्षा दिशा-निर्देशों के मद्देनजर उनके एनओसी के अनुरोध को खारिज किया जाता है.

याचिकाकर्ता के वकील मिलिंद साठे ने दलील दी कि परियोजना को सारी अनुमति मिली है और अब मनमाने तरीके से निर्माण रोकने को उनसे कहना अतर्कसंगत और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है.

अदालत ने हालांकि इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया.

Source: samaylive.com

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