एजेंडा आज तक में बाबा रामदेव और गुत्थी की मीठी नोंकझोक

5 December, 2013 5:19 AM

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एजेंडा आज तक में बाबा रामदेव और गुत्थी की मीठी नोंकझोक

मेरा बचपन

साइकिल से शुरुआत हुई, फिर बस ट्रेन और हवाई जहाज तक पहुंचा. एक बार हेलिकॉप्टर में भी बैठा हूं. मंडी डबवाली नाम के छोटे से शहर से हूं. वहां पर बड़ी सारी गुत्थियां होती हैं. वहां से ग्रेजुएशन करने चंडीगढ़ आया. तब मैं हैमलेट प्ले करता था. सीरियल रोल करता था. मगर रोज शाम को फनी मिमिक्री करता था. मैंने ज्यादातर एक्ट अपने रिश्तेदारों से सीखे हैं.

कॉलेज में था, तो जेब में कम पैसे होते थे. उस वक्त मैंने अपने पंजाब के एक शहर मलोट में रहने वाले मामा को फोन लगाया. उन दिनों एसटीडी के मीटर चलते थे.फोन मामी ने उठाया. उन्होंने जिस अंदाज में बात की. वो मैंने पकड़ लिया और आगे कॉमेडी में इस्तेमाल करने लगा.

वैसे ही एक शराबी था, पवना, जिसकी एक्टिंग के चक्कर में मैं पिटा भी. वो दिन में गोलगप्पे खिलाता था. शाम को शराब पीकर खंभे से बातें करता था. बोलता कि मैं तेरे नाल बियाह करने आया हूं. तो इन्हीं सब कैरेक्टर्स को मैं अपने घर की शादियों में एक्ट करता था और लोग देखकर खूब हंसते थे.

कैसे बनी गुत्थी

अब जी कोई बल्ब तो है नहीं, कि तीन हजार बार कोशिश की और बन गया. ऑब्जरवेशन से ही बना. मैं जिस कॉलेज में था. वहां 4300 लड़के थे और 7 लड़कियां. 7 में से 4 कॉलेज नहीं आती थीं. बचीं सिर्फ 3. तो सैकड़ों एक ही लड़की को देखते. एक कोई लड़की धोखे से अगर रिजल्ट भी पूछ लेती, तो बंदे की फूंक बढ़ जाती. तो ऐसा माहौल था. उन्हीं लड़कियों को देखकर मैं बड़ा हुआ हूं. उन्हीं सबसे गुत्थी बनी.

कैसे करते हैं कॉमेडी

मुझे कॉमेडी करनी नहीं आती. सच बोल रहा हूं. मैं सिर्फ अपने आसपास के किरदारों का ऑब्जर्व करता हूं. कोई कैमरे वाला, कोई काम वाली, कोई आंटी कोई और. तो उन्हीं सबसे मिलकर बन जाती है कॉमेडी. मुझे जो काम अच्छा आता है, वह है किरदारों की रुह में घुसना. यही मेरे लिए मेडिटेशन है यही एक्टिंग. इसमें बहुत मजा आता है.

सुनील ने बाबा रामदेव से खूब मजाक किया. उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वह टीवी देखते हैं? इस पर रामदेव ने कहा, 'ज्यादा नहीं, पर टीवी पर न्यूज सुनता हूं. न्यूज चैनल से ही पता चला कि आप गुत्थी का किरदार करते हैं. गुत्थी का मतलब क्या होता है मुझे पता नहीं. मैंने ये भी सुना था कि आपने कम पैसा मिलने की वजह से शो छोड़ दिया.' फिर संचालक के बुलाने पर सुनील मंच पर आ गए और बाबा रामदेव से बोले कि क्या वह चुटकुला सुनना पसंद करेंगे?

सुनील ने अपने किरदारों 'सुड' और 'विकी चड्ढा' का नमूना भी पेश किया. उन्होंने एजेंडा आज तक के लिए खास तौर से गुत्थी का सिग्नेचर गीत 'आप आए हैं हमारे द्वार, फूल खिले हैं एजेंडा एजेंडा' पेश किया.

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Source: aajtak.intoday.in

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