खाद्य सुरक्षा योजना को खतरा नहीं : शर्मा

7 December, 2013 4:51 AM

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विश्व व्यापार मंच की बाली बैठक में भारत के दृढ़ रवैऐ और विश्वस्नीय पहल से विकासशील देश अपने मौजूदा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम और अनाज की सरकारी खरीद के कार्यक्रमों को इस मामले में कोई नया समझौता होने तक बिना किसी पाबंदी के डर के जारी रख सकेंगे.

बैठक में भारतीय दल के नेता एवं वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने 1995 में विश्व व्यापार संगठन के गठन के बाद इसे पहला व्यापक ऐतिहासिक समझौता बताया और कहा कि यह भारत एवं दुनिया के सभी विकासशील देशों के लिए ‘महान उपलब्धि’ का दिन है.

डब्लूटीओ की 3 सितंबर को शुरू हुई बैठक में चार दिन की रस्साकशी के बाद तैयार संशोधित बाली पैकेज में व्यापार एवं कस्टम प्रक्रिया को सरल बनाने तथा अल्पविकसित देशों को शुल्क मुक्त और कोटा मुक्त निर्यात की छूट देने के पैकेज भी शामिल है.

प्रतिनिधि मंडल नेताओं की बैठक में तय बाली पैकेज को अब पूर्ण अधिवेशन में पारित कराने की औपचारिकता मात्र शेष रह गयी है. बैठक के आखिरी दिन था पर समझौता होने में विलम्ब के कारण शर्मा सहित तमाम मंत्रियों को अपनी वापसी के कार्यक्रम बदलने पड़ गए.

जिनीवा में तैयार पहले के प्रस्ताव पर भारत को आपत्ति थी और उसने यहां आने के साथ ही स्पष्ट कह दिया था कि भारत खाद्य सुरक्षा और अनाज की सरकारी खरीद पर कोई ऐसा अंतरिम समाधान स्वीकार नहीं करेगा जिसे पक्के समाधान तक जारी रखने का वचन न हो.

जिनीवा प्रस्ताव में एक तथाकथित ‘शांति उपबंध’ के तहत भारत को चार साल की मोहलत दी गई थी. इसके बाद खाद्य सब्सिडी का आंकड़ा उत्पादन लागत के 10 प्रतिशत तक सीमित रखने के नियम का उल्लंघन होने पर डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत पाबंदी लग सकती थी.

नए प्रस्ताव के तहत खाद्य सुरक्षा के लिए अनाज के सार्वजनिक भंडार के बारे में एक अंतरिम व्यवस्था लागू होगी और इस दौरान जिनीवा में एक पक्का समझौता तैयार किया जाएगा. इस दौरान कई सदस्य विकासशील देशों के मौजूदा कार्यक्रम के विषय में डब्ल्यूटीओ में कोई शिकायत करने से परहेज करेगा.

बैठक में जिस समझौते के मसौदे पर सहमति बनी है उससे खाद्य सुरक्षा का अधिकार बना रहेगा और भारत अपने 20 अरब डालर के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ सकेगा. समझौते को पूर्ण सत्र में स्वीकार किया जायेगा.

इस समझौते से डब्ल्यूटीओ में नई ऊर्जा और जोश आयेगा, क्योंकि कल तक दोहा दौर की बातचीत के आगे बढ़ने को लेकर संशय बना हुआ था. ये वार्तायें 2001 से लंबित पड़ी थीं.

सूत्रों का कहना है कि शर्मा ने जो कड़ा रुख अपनाया उससे विकासशील देशों के गरीब और खेती से जीविका चलाने वाले किसानों के पक्ष में यह समझौता हो सका.

नये मसौदा के अनुसार खाद्य सुरक्षा के तहत अनाज खरीद के चलाये जाने वाले तमाम कार्यक्रमों को डब्ल्यूटीओ में विवादों से दूर रखा जायेगा. इनका बचाव किया जायेगा.

Source: samaylive.com

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