चीन ने विवादित क्षेत्र में भेजे लड़ाकू विमान

29 November, 2013 11:20 PM

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चीन के पूर्वी चीन सागर को अपने वायुक्षेत्र में बताए जाने के बाद उपजे तनाव के खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं.

उसने इस विवाद में नई कड़ी जोडते हुए अब इस क्षेत्र में अपने युद्धक विमानों को भेजा है.

वायुसेना के प्रवक्ता कर्नल शेन जिंके ने बताया कि कई लड़ाकू जेट विमान पूर्वी चीन सागर में भेजे गए हैं. उन्होंने इसे चीन की ओर से की गई रक्षात्मक कार्रवाई बताया है.

साथ ही कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत ही पूर्व चेतावनी के रूप में इन विमानों को नियमित गश्त पर भेजा गया है. चीन ने गत शनिवार को लगभग पूरे पूर्वी चीन सागर को अपने वायुसीमा रक्षा क्षेत्र का हिस्सा बताया था.

इसमें विवादित सेनकाकू द्वीप समूह शामिल हैं जिसे चीन में दिआओयू कहा जाता है जिस पर जापान, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान अपना-अपना दावा ठोंकते हैं. इस इलाके में पानी के नीचे एक चट्टान है जिसे दक्षिण कोरिया अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है.

इस द्वीपसमूह में पांच द्वीप और तीन मूंगे की चट्टाने हैं परंतु मानवीय बसावट नहीं है लेकिन यहां तेल और प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार हैं. अमेरिका इस द्वीप समूह पर जापान के प्रशासनिक अधिकार को मान्यता देता है.

टोक्यो के निकट एक अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डे के पास दो राकेट लांचरों से हमला किया गया है. हालांकि इस दौरान किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.

मीडिया के अनुसार इस हमले के पीछे एक छोटे कट्टरपंथी समूह का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है जिसके एक सदस्य को कुछ ही घंटों पहले गिरफ्तार किया गया था.

टोक्यो मेट्रोपोलिटन पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि यह हमला बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े 11 बजे हुआ. पुलिस ने स्टील के दो पाइप, दो तारें, बैटरियां और अन्य सामान बरामद किया है. अभी तक किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं मिली है. पुलिस को अभी प्रक्षेपित हथियार नहीं मिला है.

स्थानीय मीडिया ने बताया कि पाइपें मैदान में गड़ी हुई थी और उनका ऊपरी हिस्सा योकोता वायु ठिकाने की दिशा में था. अभी तक किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. इस हमले के पीछे रेवोल्यूशनी लेबर्स एसोसिएशन एंटी मैजोरिटी फैक्शन का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है.

Source: samaylive.com

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