‘चारफुटिया छोकरे’ का दमदार संदेश

27 September, 2014 10:05 AM

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मुंबई (एसएनएन): बाल मजदूरी के साथ बच्चों के अपहरण के मुद्दे को फिल्म 'चारफुटिया छोकरे' में छूने की कोशिश की गई है. इस फिल्म के लिए निर्देशक मनीष शंकर ने बिहार के बेतिया जिले के एक गांव बिरवा को चुना है. उनके इस ख्याली गांव में शोषण और दमन की वजह से अपराध बढ़ चुके हैं. संरक्षक पुलिस और व्यवस्था से मदद नहीं मिलने से छोटी उम्र में ही बच्चे अपराध की अंधेरी गलियों में उतर जाते हैं. फिल्म का सब्जेक्ट पुराना होने के साथ-साथ बहुत ही अच्छा भी है और कहानी में थोड़ा नयापन भी है.

मुंबई (एसएनएन): बाल मजदूरी के साथ बच्चों के अपहरण के मुद्दे को फिल्म 'चारफुटिया छोकरे' में छूने की कोशिश की गई है. इस फिल्म के लिए निर्देशक मनीष शंकर ने बिहार के बेतिया जिले के एक गांव बिरवा को चुना है. उनके इस ख्याली गांव में शोषण और दमन की वजह से अपराध बढ़ चुके हैं. संरक्षक पुलिस और व्यवस्था से मदद नहीं मिलने से छोटी उम्र में ही बच्चे अपराध की अंधेरी गलियों में उतर जाते हैं. फिल्म का सब्जेक्ट पुराना होने के साथ-साथ बहुत ही अच्छा भी है और कहानी में थोड़ा नयापन भी है.

क्राइम बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म द्वारा सोशल मैसेज देने की कोशिश की गई है लेकिन स्क्रीप्ट कमजोर होने के कारण दर्शकों को थोड़ी कम भाई है. हालांकि फिल्म के किरदारों द्वारा फिल्म को दमदार बनाने में कामयाबी हाथ लगी है.

क्राइम बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म द्वारा सोशल मैसेज देने की कोशिश की गई है लेकिन स्क्रीप्ट कमजोर होने के कारण दर्शकों को थोड़ी कम भाई है. हालांकि फिल्म के किरदारों द्वारा फिल्म को दमदार बनाने में कामयाबी हाथ लगी है.

विदेश से अपने शहर लौटती नेहा यानि अभिनेत्री सोहा अली खान गांव में स्कूल बनाना चाहती हैं ताकि शहर से दूर गांव में रहने वाले बच्चों को भी एजुकेशन मिल सके. नेहा हमेशा अच्छा और सकरात्मक ही सोचती हैं. नेहा को यकीन है कि उनके इस सपने को साकार करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन नेहा को यह नहीं पता कि उनके इस सपने का गांववाले ही सबसे ज्यादा विरोध करेंगे.

विदेश से अपने शहर लौटती नेहा यानि अभिनेत्री सोहा अली खान गांव में स्कूल बनाना चाहती हैं ताकि शहर से दूर गांव में रहने वाले बच्चों को भी एजुकेशन मिल सके. नेहा हमेशा अच्छा और सकरात्मक ही सोचती हैं. नेहा को यकीन है कि उनके इस सपने को साकार करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन नेहा को यह नहीं पता कि उनके इस सपने का गांववाले ही सबसे ज्यादा विरोध करेंगे.

नेहा इसी गांव के 3 ऐसे लड़कों से मिलती हैं जो 11-13 साल की उम्र के हैं जिनका नाम है अवधेश, हरि और गोरख. इनकी नेहा से पहली मुलाकात तो अच्छे माहौल में होती है पर अफसोस इसके बाद नेहा को जो पता चलता है उसे सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं.

नेहा इसी गांव के 3 ऐसे लड़कों से मिलती हैं जो 11-13 साल की उम्र के हैं जिनका नाम है अवधेश, हरि और गोरख. इनकी नेहा से पहली मुलाकात तो अच्छे माहौल में होती है पर अफसोस इसके बाद नेहा को जो पता चलता है उसे सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं.

नेहा को पता चलता है कि तीनों लाखन (जाकिर हुसैन) के गिरोह के लिए काम करते हैं और उसके इशारों पर मर्डर करते हैं. इसी बीच नेहा की मुलाकात अवधेश की मां (सीमा बिस्वास) से होती है. उनसे मिलने के बाद नेहा फैसला करती है कि वह अपने दम पर इस गांव में फैले गैर कानूनी धंधों को बंद कराकर गांव वालों को स्कूल देने के साथ इन तीनों को भी जुर्म की दुनिया से बाहर लाकर ही दम लेगी लेकिन नेहा को सबसे पहले गांव के उन लोगों को सामना भी करना है जो नहीं चाहते उनका यह गैर-कानूनी धंधा खत्म हो.

नेहा को पता चलता है कि तीनों लाखन (जाकिर हुसैन) के गिरोह के लिए काम करते हैं और उसके इशारों पर मर्डर करते हैं. इसी बीच नेहा की मुलाकात अवधेश की मां (सीमा बिस्वास) से होती है. उनसे मिलने के बाद नेहा फैसला करती है कि वह अपने दम पर इस गांव में फैले गैर कानूनी धंधों को बंद कराकर गांव वालों को स्कूल देने के साथ इन तीनों को भी जुर्म की दुनिया से बाहर लाकर ही दम लेगी लेकिन नेहा को सबसे पहले गांव के उन लोगों को सामना भी करना है जो नहीं चाहते उनका यह गैर-कानूनी धंधा खत्म हो.

Source: shrinews.com

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