'तमंचे' में बंदूक की नाल पर इश्क का बुखार

10 October, 2014 10:37 AM

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फिल्म तमंचे दो ऐसे प्रेमियों की कहानी है. जो बुरे काम करते हैं. लेकिन दिल से बुरे नहीं हैं. तमंचे मुन्ना और बाबू की कहानी है. दोनों का मिलना अनजान रास्ते पर होता है और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है. लेकिन इस प्रेम कहानी में ताऊ(राणो) है. और उसे अपने रास्ते से हटाना आसान नहीं. लेकिन फिर भी मुन्ना मिश्र हर जोखिम को उठाने के लिए तैयार है. दोनों प्रेम करते हैं. लेकिन उनके प्यार का अंदाज अलग है. इस फिल्म की खूबी यह है कि फिल्म में मुन्ना या बाबू के परिवार की कहानी या फिर मुन्ना या बाबू की जिंदगी के रोने धोने को लेकर बेवजह दर्शकों से हमदर्दी बटोरने की कोशिश नहीं की गयी है.

फिल्म की यही खासियत दर्शकों को बांधे रखती है. भोली पंजाबन के बाद दूसरी बार ऋचा ने वैसा ही किरदार निभाया है. वह गैंगस्टर की टीम की अहम हिस्सा है. उसे गोलियां चलाना, पुलिस की आंखों में धूल झोंकना भी उसे बखूबी आता है. लेकिन जब उसे प्यार होता है. तो वह मुन्ना से कहती है कि बंदूक चलाना जान लिया तो चूल्हा चौका भी कर ही लूंगी. ऋचा ने साबित कर दिया है कि वर्तमान में वे इस तरह के बिंदास और बोल्ड किरदार निभाने वाली चूनिंदा अभिनेत्रियों में से एक हैं और फिल्म में उनके संवाद, उनका अंदाज आपका ध्यान आकर्षित करता है.

निखिल लंबे अरसे के बाद लौटे हैं परदे पर. वह खुद उत्तर प्रदेश से हैं इसलिए मुन्ना मिश्र के किरदार में जंचे हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश की बोली को बखूबी पकड़ा है. सो, वे किरदार में ढले नजर आये. फिल्म की कमजोरी फिल्म की कहानी है. ऐसी फिल्मों में अगर थोड़ा रोमांच भी होता तो फिल्म का स्तर बढ़ जाता. लेकिन फिल्म प्रेम कहानी तक सीमित रह जाती है और ऐसी कई चीजें जो हमने देखी है. वे हम फिर से देखते हैं.

हालांकि फिल्म का अंतराल से पहले का भाग रोचक है. लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स आपको निराश करता है. निर्देशक ने एक अच्छे प्लॉट, अच्छे कलाकार के साथ एक खूबसूरत फिल्म बनाने का मौका खो दिया.

Source: prabhatkhabar.com

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