तस्लीमा नसरीन पर एक और विवाद

20 December, 2013 12:30 AM

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बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन पर एक और विवाद हो गया और टीवी धारावाहिक का प्रसारण स्थगित करना पड़ा.

तस्लीमा द्वारा लिखी पटकथा पर आधारित धारावाहिक के एक बंगला चैनल पर प्रसारण को उस समय अनिश्चित समय के लिए स्थगित करना पड़ा जब मुस्लिम कट्टरपंथियों के विरोध प्रदर्शन किया और आपत्ति व्यक्त की. लेखिका ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसकी कहानी का धर्म से कोई लेना देना नहीं है.

‘आकाश अथ’ चैनल पर गुरुवार की रात ‘दुसाहोबास’ (कठिन जिंदगी) का प्रसारण होना था.

अल्पसंख्यक समूह मिल्ली इत्तेहाद परिषद के अब्दुल अजीज और कोलकाता स्थित टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम मौलाना नुरूर रहमान बरकती ने चैनल को इस धारावाहिक का प्रदर्शन रोकने की चेतावनी देते हुए कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

तस्लीमा ने कहा कि इस नये चैनल आकाश अथ पर आज राज जिस धारावाहिक का प्रसारण किया जाना था, उसकी कहानी शहर में बसे एक हिन्दू परिवार के बारे में हैं.

अपने बयान में चैनल ने कहा कि धारावाहिक महिला सशक्तिकरण पर आधारित है और इसका किसी भी धर्म या समुदाय से कोई लेना देना नहीं है.

अल्पसंख्यक समूह मिल्ली इत्तेहाद परिषद के अब्दुल अजीज ने प्रेट्र से कहा कि उन्होंने निर्माताओं को पत्र लिखकर धारावाहिक से तस्लीमा का नाम एवं उल्लेख वापस लेने तथा ऐसे दृश्यों को हटाने को कहा है जो विवाद पैदा कर सकते हैं.

अल्पसंख्यक समूह के कारण चैनल पहले ही सभी होडि’ग से तस्लीमा का नाम हटाने को मजबूर हुआ है.

अखिल भारतीय अल्पसंख्यक मंच के इदरिस अली ने आरोप लगाया कि तसलीमा राज्य में शांति एवं सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं.

तस्लीमा को 1994 में लज्जा उपन्यास के जरिये कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में बांग्लादेश से निर्वासित कर दिया गया था.

यूरोप में लम्बे समय तक रहने के बाद उन्होंने 2004 में शहर में आश्रय लिया था. नवंबर 2007 में शहर में हिंसक प्रदर्शन के बाद उन्हें नयी दिल्ली में अज्ञात स्थान पर रखा गया . इसके बाद से वह वहीं रहती हैं.

Source: samaylive.com

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