दिमाग घर छोड़कर जाएँ और लें इस फिल्म का पूरा मजा - Hindi News India, Latest news in Hindi, World, Cricket, Politics, Business and Entertainment - ABP News formerly Star News

7 June, 2014 1:18 PM

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फिल्म का नाम ‘हॉलीडे’ क्यों रखा गया गया? इंटेलिजेंस एजेंसी के कमांडिंग ऑफिसर के रोल के लिए गोविंदा को क्यों चुना गया? एक्शन थ्रिलर में ज़बर्दस्ती रोमांस और गाने ठूंस कर इसे बोझिल क्यों बनाया गया? फिल्म देखते वक़्त अगर आप ऐसे सवाल ना पूछें तो शायद ये मसालेदार फिल्म आपका मनोरंजन कर भी सकती है.

डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी का कैप्टन विराट बक्शी (अक्षय कुमार) शादी के लिए लड़की देखने के लिए ‘हॉलीडे’ पर मुंबई आया है. इसी दौरान एक स्कूल बस में ब्लास्ट होता है और कई बच्चे मारे जाते हैं. विराट इस साजिश की तह तक जाने की कोशिश करता है तो आतंकवादियों और उनकी स्लीपर सेल्स का पूरा नेटवर्क सामने आने लगता है. अपनी ‘हॉलीडे’ भूलकर विराट किसी सुपरहीरो की तरह मुंबई को बचाने के मिशन में जुट जाता है.

फिल्म के निर्देशक कुछ साल पहले फिल्म ‘गजनी’ बना चुके ए आर मुरगादौस हैं. ये उनकी 2011 की तमिल हिंट फिल्म ‘थुपक्की’ की रीमेक है. ‘थुपक्की’ बेहद मनोरंजक फिल्म थी जिसकी एक बड़ी वजह फिल्म में विलेन का रोल निभाने वाले अभिनेता विद्युत जमवाल थे. ‘हॉलीडे’ में ये रोल फरहाद दारूवाला ने निभाया है और मज़बूत रोल के बावजूद वो अक्षय कुमार के सामने बेहद हल्के लगे हैं. फिल्म के क्लाईमैक्स में दोनों की फाइट 70 के दशक की फॉर्मूला फिल्मों की याद दिला देगी. मगर इस हिंसात्मक सीन को देखकर आप हीरो के लिए ताली नहीं बजाएंगे, बल्कि आपको हंसी आएगी.

एक एक्शन हीरो के रूप में अक्षय ज़बरदस्त फॉर्म में हैं. पूरी फिल्म वो अपने कंधों पर लेकर चलते हैं. मगर फिर उनके कॉमेडी और रोमांस वाले सीन डालकर सोनाक्षी वही सब करती नज़र आ रही हैं जो वो हर फिल्म में करती हैं. मुंबई पुलिस के अफसर के रूप में सुमित राघवन ने अच्छा अभिनय किया है. फिल्म में छोटे से रोल में गोविंदा भी हैं, मगर इंटेलिंजेस अफ़सर के रूप में वो पूरी तरह मिसकास्ट नज़र आते हैं.

फिल्म लगभग तीन घंटे लंबी है और यही फिल्म की ख़ामी है. फिल्म के एक्शन वाले हिस्से अच्छे हैं और जब-जब रोमांच शुरू होता है, कहानी मूल विषय से भटक कर नाच-गाने में उलझ जाती है. अक्षय-सोनाक्षी का रोमांटिक ट्रैक फिल्म का सबसे कमज़ोर पहलू है जिसका कहानी से कोई लेना-देना नहीं है. फिल्म में प्रीतम का संगीत बेहद साधारण है.

गजनी के बाद एक बार फिर निर्देशक के पास एक शानदार एक्शन थ्रिलर बनाने का पूरा मौक़ा था. लेकिऩ फिल्म चलाने की कोशिश में, सारे मसाले एक साथ डाल कर वो बस एक साधारण फिल्म ही बना सके. आप कम से कम इस थ्रिलर के बढ़िया एक्शन सीन्स का मज़ा ले सकते हैं, शर्त ये हैं कि अक्षय की पिछली फिल्मों की तरह इस बार भी दिमाग़ को घर छोड़कर जाइए.

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Source: abpnews.abplive.in

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