दिलीप कुमार अपने भाइयों के खिलाफ पहुंचे हाइकोर्ट

29 June, 2014 2:23 PM

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उनके भाई असलम और एहसान ने दिलीप कुमार को और उनके पाली हिल वाले घर को दोबारा बना रही कंपनी को कोर्ट में चुनौती दी है. दिलीप कुमार के दोनों भाइयों का दावा है कि जून 2007 हमारे बीच एक करार हुआ था. इस करार के मुताबिक एहसान को 1200 स्क्वेयर फीट का एक फ्लैट और असलम को एक 800 स्क्वेयर फीट का फ्लैट दिया जाना था.

लेकिन दिलीप कुमार ने दावा किया है कि जिस बंगले में वह अपनी पत्नी और भाइयों के साथ रह रहे थे, उसे उन्होंने खुद अपनी कमाई से 1953 में खरीदा था. उन्होंने अपने भाइयों को वहां रहने की इजाजत दी हुई थी. उनका कहना है कि उन्होंने ह्युमैनीटेरियन ग्राउंड पर घर देने का करार किया था लेकिन वे दोनों इसका गलत फायदा उठा रहे हैं.

इस बंगले का प्लॉट एक खताऊ ट्रस्ट के नाम है. इस ट्रस्ट ने हसन चमरुद्दीन के पक्ष में 999 सालों की लीज़ डील साइन की थी, जिनके दिलीप कुमार ने राइट्स खरीद लिए थे.

2006 में दिलीप कुमार ने बंगले को दोबारा विकसित करने के लिए श्रेयांस रिसोर्सेस लिमिटेड नामक कंपनी को यह काम सौंपा था. जब उन्होंने अपने भाइयों से बंगला खाली करने के लिए कहा तो एहसान और असलम ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. खबर है कि तब दोनों भाईयों ने सायरा बानो से संपर्क किया और सायरा बानो ने हस्तक्षेप करके ह्युमैनीटेरियन ग्राउंड पर घर देने का करार किया था.

दिलीप कुमार का कहना है कि अब इसी हलफनामे को आधार बनाकर दोनों भाई जबरदस्ती हक जता रहे हैं. दिलीप कुमार और पत्नी सायरा बानो द्वारा दाखिल किए गए इस हलफनामे में यह भी कहा गया है कि उनके पास अपने भाइयों को नए मकान देने के लिए पैसे नहीं हैं.

कहानी में एक और ट्विस्ट भी है. दरअसल प्रॉपर्टी के असली मालिक यानि खताऊ ट्रस्ट के उत्तराधिकारियों ने भी कुमार के खिलाफ न्यायालय में जगह खाली कराने के लिए मुकदमा दायर कर दिया है. अब बिल्डर ने भी कंस्ट्रक्शन का काम बंद कर दिया है, जिससे इस नई बिल्डिंग का काम अधुरा रह गया है.

Source: abpnews.abplive.in

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