नये साल में शेयर बाजार में निवेश का कैसे करें आगाज

5 January, 2014 5:46 AM

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शेयर बाजार में निवेश के लिहाज से साल 2013 किसी को काफी कुछ दे गया तो किसी को बाजार में नुकसान भी उठाना पड़ा.

बीते साल के नफा-नुकसान को भूलकर हर निवेशक नए साल में इस विश्वास के साथ बाजार में उतरना चाह रहा है कि इस बार उसे कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा कमाना है. कम से कम एक साल के लिए शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए मुनाफा कमाने का एक सीधा मंत्र यह हो सकता है कि ऐसे क्षेत्रों में निवेश किया जाए जिन क्षेत्रों में कुछ अच्छी खबरें आने की उम्मीद हो.

2014 में होने वाले आम चुनाव न केवल एक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम होंगे बल्कि इसका सीधा और व्यापक असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिलेगा.

जानकारों के बीच आमराय यह भी है कि आम चुनाव का ट्रिगर ही बाजार में कोहरे को कम करके स्पष्ट चाल के संकेत दे सकता है.

एक मजबूत सरकार चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल की क्यों न हो, बाजार में एक नई जान फूंक सकती है. इसके विपरीत एक कमजोर सरकार बाजार के लिए चिंता का सबब होगी.

वर्ष 2014 में आम चुनाव से बड़ा ट्रिगर अभी किसी भी जानकार की सूची में नहीं है. छोटे-मोटे घटनाक्रमों से बाजार में तत्काल प्रतिक्रिया भर जरूर होगी लेकिन एक बड़ी चाल का संकेत आम चुनाव के परिणामों में ही छिपा है.

वैसे तो यह कहना मुश्किल होता है कि मुनाफा किन क्षेत्रों में छिपा है लेकिन हम बात करते हैं कुछ ऐसे क्षेत्रों की जहां मुनाफा होने की संभावना ज्यादा है. फिर भी निवेशकों को अपने विवेक, रिसर्च रिपोर्ट, कंपनियों के पिछले वित्तीय परिणामों, विशेषज्ञ सलाह व अन्य चीजों को ध्यान में रखकर ही निवेश करना चाहिए.

मीडिया या पेपर इंडस्ट्री : आम चुनाव में हर राजनीतिक दल अपने प्रचार एवं प्रसार पर जबरदस्त खर्च करता है.

चुनाव का परिणाम भले ही कुछ भी हो लेकिन प्रचार हर राजनीतिक दल और उम्मीदवार करता है. टेलीविजन और समाचार पत्रों को प्रचार के सबसे सशक्त माध्यम के रूप में माना जाता है. इसलिए इस साल आम चुनाव के कारण इन कंपनियों को अच्छा फायदा हो सकता है.

रिटेल, लॉजिस्टिक और रीयल्टी सेक्टर : पाठक इन तीनों सेक्टरों को एक साथ पढ़कर कन्फ्यूज न हों. इन तीनों को एक साथ लिखने का एक वाजिब कारण है. सरकार एफडीआई के क्षेत्र में सुधार के मार्ग पर जिस तरह अग्रसर है, उससे यह स्पष्ट है कि देश में अब आइकिया और टेस्को जैसे बड़े खिलाड़ी प्रवेश करेंगे. अब सीधी सी बात है कि जब ये बड़ी कंपनियां देश में पदार्पण करेंगी और स्टोर खोलेंगी तो वे इन स्टोर में सामग्री लाने के लिए लॉजिस्टिक्स का इस्तेमाल करेंगी. अत: इससे उन लॉजिस्टिक कंपनियों को फायदा होगा जिनका कारोबार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है. रिटेल सेक्टर के ये बड़े खिलाड़ी गोदाम और स्टोर खोलने के लिए शहर के बाहर बड़े स्तर पर खाली पड़ी जमीनों का अधिग्रहण करेंगे जिससे रीयल्टी क्षेत्र की वे कंपनियां लाभान्वित होंगी जिनके पास मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरू जैसे बड़े शहरों के आसपास जमीनें हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कैपिटल गुड्स : इस क्षेत्र में तेजी इसलिए आ सकती है क्योंकि चुनाव नजदीक होने पर सरकार तमाम वादों को पूरा करती नजर आती है, मसलन उत्तर प्रदेश में इस समय कई अस्पताल और सड़क निर्माण की योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा रहा है. इसी तर्ज पर जिन चार राज्यों में हाल में मजबूत सरकार बनी है उनके साथ ही केंद्र सरकार भी कई योजनाएं अमल में ला सकती है जिसका फायदा इस क्षेत्र को पहुंचता दिखाई दे सकता है. निर्माण से जुड़ी अच्छी कंपनियों पर दांव लगाया जा सकता है.

ऑटो सेक्टर : बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद इसे चौथे नंबर पर रखने के पीछे कारण है कि इस क्षेत्र के साथ एक नकारात्मक ट्रिगर भी जुड़ा है, जो कि ब्याज दरों का है. हाल फिलहाल में इस तरह का माहौल बना हुआ है और महंगाई भी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है जिसके कारण ब्याज दरों के नीचे आने की उम्मीद कम ही है लेकिन पिछले तीन महीने में जो चाल ऑटो एंसीलरी क्षेत्र में दिखी है उससे यह लगता है कि आने वाले दिनों में ऑटो सेक्टर चाल दिखा सकता है, क्योंकि ऑटो एंसीलरी क्षेत्रों की चाल यह दर्शाती है कि इन्हें आटो कंपनियों से आर्डर मिले हैं.

अब जब पुर्जे खरीदे गए हैं तो गाड़ियां भी बिकेंगी. यदि ब्याज दरों में थोड़ी सी कमी आती है तो यह क्षेत्र भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है.

इन क्षेत्रों में अधिकतर छोटे क्षेत्र अवश्य हैं लेकिन इनमें चाल दिखने की संभावना अच्छी खासी है. इन छोटे क्षेत्रों की मोटी कंपनियों में पैसा लगाया जा सकता है.

इस तरह की रणनीति अपनाकर एक निवेशक साल का शुभारंभ कर सकता है. लेकिन जो भी पैसा बाजार में निवेश किया जाए उसे एक कंपनी के शेयरों में निवेश करने की जगह कई कंपनियों में निवेश किया जाना चाहिए.

इससे फायदा यह होगा कि अगर एक कंपनी के शेयर उम्मीद के अनुरूप मुनाफा न दे पाए तो दूसरी कंपनी के शेयरों से इसकी भरपाई की जा सकती है.

Source: samaylive.com

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