नेल्सन मंडेलाः एक युग का अंत

5 December, 2013 10:30 PM

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नेल्सन मंडेलाः एक युग का अंत

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का निधन हो गया है. वे 95 साल के थे.

उन्होंने दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेदी सरकार की जगह एक लोकतांत्रिक बहुनस्ली सरकार बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया और इसके लिए वे 27 साल तक जेल में रहे.

देश के पहले काले राष्ट्रपति का पद संभालते हुए उन्होंने कई अन्य संघर्षों में भी शांति बहाल करवाने में अग्रणी भूमिका निभाई.

जिन लोगों ने उन्हें जेल में बंद रखा, यातनाएं दीं उनके प्रति भी उन्होंने कोई कड़वाहट नहीं दिखाई.

वे हमेशा खुशमिजाज़ नज़र आए और उनके व्यक्तित्व और ज़िंदगी की कहानी ने पूरी दुनिया को रिझाया.

पांच साल राष्ट्रपति बने रहने के बाद 1999 में उन्होंने कुर्सी छोड़ी और दक्षिण अफ़्रीका के सबसे प्रभावशाली राजनयिक साबित हुए.

उन्होंने एचआईवी और एड्स के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ी और दक्षिण अफ़्रीका के लिए 2010 के फ़ुटबॉल विश्व कप की मेज़बानी हासिल करने में भी उनकी भूमिका रही.

मंडेला कॉंगो, बुरूंडी और अफ़्रीका के अन्य देशों में शांति बहाल करने की प्रक्रिया में भी शामिल रहे.

साल 2001 में उन्हें पता चला कि उन्हें प्रोस्टेट कैंसर है और 2004 में उन्होंने सार्वजनिक ज़िंदगी से ये कहकर संन्यास लिया कि वो अपने परिवार और दोस्तों के साथ ज़्यादा समय बिताना चाहते हैं और 'आत्मचिंतन' में वक्त लगाना चाहते हैं.

कार्यक्रमों और समारोहों के लिए न्योता भेजनेवालों के लिए उन्होंने संदेश दिया, "आप मुझे फ़ोन मत कीजिएगा, मैं आपको फ़ोन कर लूंगा."

वो मदीबा कबीले से थे और दक्षिण अफ़्रीका में उन्हें अक्सर उनके कबीले के नाम यानी 'मदीबा' कहकर बुलाया जाता था.

उनके कबीले ने उनका नाम रोलिहलाहला दालिभंगा रखा था लेकिन उनके स्कूल के एक शिक्षक ने उनका अंग्रेज़ी नाम नेल्सन रखा.

उनके पिता थेंबू राज परिवार में सलाहकार थे और जब उनकी मृत्यु हुई तो नेल्सन मंडेला नौ साल के थे.

वो 1943 में अफ़्रीका नैशनल कांग्रेस से जुड़े, पहले एक कार्यकर्ता के तौर पर और फिर उसकी युवा शाखा के संस्थापक और अध्यक्ष के तौर पर.

और फिर सालों तक जेल में बंद रहने के बाद वो अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने.

मेरी कल्पना एक ऐसे लोकतांत्रिक और मुक्त समाज की है जहां सभी लोग सौहार्दपूर्वक तरीके से रहें और जिन्हें बराबरी का मौका मिले. ये वो सोच है जिसे हासिल करने के लिए मैं जीना चाहता हूं. लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो इसके लिए मैं मरने को भी तैयार हूँ.

क्लिक करें उनकी पहली शादी 1944 में हुई और इस शादी से उनके तीन बच्चे हुए. तेरह सालों बाद उनका तलाक़ हो गया.

उन्होंने क़ानून की शिक्षा ली और 1952 में जोहानेसबर्ग में अपने दोस्त ओलिवर टैंबो के साथ वकालत की शुरूआत की. इन दोनों ने रंगभेदी नीतियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया.

चार सालों के बाद 1956 में उनपर अन्य 155 लोगों के साथ देशद्रोह का आरोप लगाया गया लेकिन चार सालों तक चली सुनवाई के बाद फिर उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया.

रंगभेद के ख़िलाफ़ संघर्ष में तेज़ी आने लगी थी ख़ासकर उस क़ानून का जमकर विरोध हो रहा था जो तय करता था कि काले लोग कहां रह सकते हैं और कहां काम कर सकते हैं.

उन्होंने 1958 में विनि मादिकिज़ेला से शादी की जिन्होंने उन्हें जेल से छुड़ाने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई.

अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस को 1960 में प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया और मंडेला भूमिगत हो गए.

रंगभेदी सरकार के साथ तनाव और बढ़ा जब 1960 में 69 काले लोग पुलिस की गोलियों का शिकार बनाए गए. उसे शार्पविल हत्याकांड के नाम से जाना गया.

उस घटना ने शांतिपूर्ण संघर्ष पर विराम लगा दिया और मंडेला ने भी आर्थिक भीतरघात का अभियान शुरू किया.

उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और उनपर भीतरघात और हिंसक तरीकों से तख़्तापलट का आरोप लगा.

रिवोनिया की अदालत में अपना बचाव खुद करते हुए मंडेला ने लोकतंत्र, आज़ादी और बराबरी पर अपने विचार दुनिया के सामने रखे.

उन्होंने कहा, "मेरी कल्पना एक ऐसे लोकतांत्रिक और मुक्त समाज की है जहां सभी लोग सौहार्दपूर्वक रहें और जिन्हें बराबर का मौका मिले."

उन्होंने कहा, "ये वो सोच है जिसे हासिल करने के लिए मैं जीना चाहता हूं. लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो इसके लिए मैं मरने को भी तैयार हूं."

बारह महीनों के अंतराल में 1968 और 1969 के बीच उनकी मां की मृत्यु हो गई और उनका सबसे बड़ा बेटा कार दुर्घटना में मारा गया लेकिन उन्हें उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने की भी इजाज़त नहीं दी गई.

विश्व समुदाय ने रंगभेदी दक्षिण अफ़्रीकी सरकार पर 1967 में लगाए गए प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया. दबाव का असर ये हुआ कि 1990 में राष्ट्रपति एफ़ डब्ल्यू डी क्लार्क ने अफ़्रीकी नैशनल कांग्रेस पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया और मंडेला को भी जेल से रिहा कर दिया गया.

रॉबेन आइलैंड पर वो 18 साल तक जेल में बंद रहे और फिर 1982 में उन्हें पॉल्समूर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया.

जिस दौरान मंडेला और उनके साथी जेल में बंद थे दक्षिण अफ़्रीका के काले-बहुल शहरों के नौजवान श्वेत अल्पमत सत्ता के ख़िलाफ़ जूझते रहे.

सैंकड़ों मारे गए और हज़ारों घायल हो गए जब स्कूली बच्चों के इस आंदोलन को कुचला गया.

मंडेला के वकील दोस्त टैंबो ने 1980 में उनकी रिहाई के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान की शुरूआत की.

विश्व समुदाय ने रंगभेदी दक्षिण अफ़्रीकी सरकार पर 1967 में लगाए गए प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया.

दबाव का असर ये हुआ कि 1990 में राष्ट्रपति एफ़ डब्ल्यू डी क्लार्क ने अफ़्रीकी नैशनल कांग्रेस पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया और मंडेला को भी क्लिक करें जेल से रिहा कर दिया गया.

दिसंबर 1993 में नेल्सन मंडेला और एफ़ डब्ल्यू डी क्लार्क को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया. पाँच महीनों के बाद दक्षिण अफ़्रीका के इतिहास में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव हुए और सभी नस्लों के लोगों ने उसमें मतदान किया.

नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति चुने गए. राष्ट्रपति के रूप मे उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी ग़रीबों के लिए घरों का इंतज़ाम. दक्षिण अफ़्रीका के बड़े बड़े शहरों में स्लम और झोपड़पट्टियों की बस्तियां नज़र आती रहीं.

उन्होंने अपने सहयोगी थाबो अंबेकी पर सरकार की प्रशासनिक ज़िम्मेदारियां डालीं और अपना ध्यान दक्षिण अफ़्रीका की नई छवि को दुनिया के सामने पेश करने पर लगाया.

इस के तहत वो देश की बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश में ही रहने और निवेश करने के लिए राज़ी कर पाए. 1992 में उनका अपनी दूसरी पत्नी के साथ तलाक हो गया था जब विनी मंडेला पर अपहरण और हमले का आरोप लगा.

अपनी 80वीं सालगिरह पर उन्होंने मोज़ांबिक के पूर्व राष्ट्रपति की विधवा ग्राका माशेल से शादी कर ली. राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी वो दुनिया का भ्रमण करते रहे, विश्व नेताओं से मिलते रहे और पुरस्कार बटोरते रहे.

आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्ति के बाद उनका ज़्यादा वक्त उनके द्वारा स्थापित मंडेला फ़ाउंडेशन के कामों में ही गुज़रा.

अपनी 89वीं सालगिरह पर उन्होंने एल्डर्स नामक संस्था का गठन किया जिसमें बड़ी और जटिल समस्याओं को सुलझाने और सुझाव देने के लिए दुनिया के बड़े बड़े नेता शामिल हुए.

जब 2005 में उनके इकलौते बेटे की मौत हुई तो सामाजिक वर्जनाओं से घिरे दक्षिण अफ़्रीकी समाज के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी मौत एड्स की बीमारी से हुई है.

उन्होंने दक्षिणी अफ़्रीकी लोगों से कहा कि वो एड्स के बारे में खुलकर बात करें जिससे वो भी एक आम बीमारी की तरह ही नज़र आए.

Source: bbc.co.uk

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