फिल्म रिव्यू:जिद्द और जुनून की मिसाल 'मैरी कॉम'

5 September, 2014 10:31 AM

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मैरी कॉम बॉक्सिंग में भारत की प्रतिनिधि के रूप में कई बार वर्ल्ड चैंपियन बनी. लेकिन आम लोग फिर भी मैरी कॉम को नहीं जानते थे. वजह साफ है, चूंकि भारत में अब भी क्रिकेट जिस हद तक लोकप्रिय है, किसी भी अन्य खेल या किसी अन्य स्पोर्ट्स को कभी बढ़ावा नहीं मिला.

ऐसे में ओमंग कुमार निर्देशक के रूप में आगे आये और उन्होंने इस विषय को चुना. सबसे पहले उन्हें ऐसे विषय चुनने के लिए बार बार बधाई. चूंकि हिंदी सिनेमा में ऐसे विषयों को चुनने की हिम्मत कम निर्देशक कर पाते हैं. दूसरी उनकी सराहना इस बात से होनी चाहिए कि उन्होंने मैरी कॉम के रूप में प्रियंका को चुना. फिल्म की खासियत है कि फिल्म कहीं भी अपनी सोच, अपने विषय से भटकती नहीं है.

मैरी कॉम किस तरह बॉक्सिंग को लेकर जिद्दी थीं. उनका क्या जुनून था. फिल्म के शुरुआत से लेकर अंत तक वही दर्शाने की कोशिश की गयी है. निस्संदेह प्रियंका बेहतरीन अभिनेत्री हैं और यह उनकी ही फिल्म है. मैरी कॉम जैसी खिलाड़ी को परदे पर दर्शाना आसान नहीं था. लेकिन ओमंग कुमार ने उसे बेहतरीन तरीके से दर्शाया है. मैरी कॉम की जिंदगी के संघर्ष, उसकी जिद्द, उसकी सोच, और खेल के प्रति लगन दर्शाती है कि अगर मैरी कॉम बनना है तो आपको सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य के बारे में ही सोचना होगा. मैरी कॉम की यह कहानी आपको प्रेरित करती है कि आप अपनी जिंदगी में कुछ भी हासिल कर सकते हैं. खासतौर से मां बनने के बाद जो लड़कियां यह सोच लेती हैं कि उनकी जिंदगी अब ठप्प हो चुकी है.

लेकिन सिजेरियन से बच्चे को जन्म देने वाली मैरी कॉम बॉक्सिंग में अगर दोबारा वापसी कर सकती हैं तो वह कुछ भी कर सकती हैं. इस फिल्म में मैरी कॉम का बेखौफ अंदाज, प्रेम से लगाव, मां की ममता और एक खिलाड़ी की जिद्द को बखूबी दर्शाया गया है. साथ ही फिल्म खेल जगत में बड़े अधिकारियों द्वारा खिलाड़ियों और खासतौर से महिला खिलाड़ियों के साथ की जा रही जाद्दती को भी दर्शाया है. मगर अफसोस सिर्फ कुछ बातों का है कि ओमंग कुमार थोड़ी हड़बड़ी में नजर आये हैं. वे चाहते तो मैरी कॉम की जिंदगी के संघर्ष को और विस्तार से दर्शाते.

Source: prabhatkhabar.com

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