फिल्‍म रिव्‍यू: फुस्स निकली फिल्‍म 'यारियां'

10 January, 2014 1:49 PM

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फिल्‍म रिव्‍यू: फुस्स निकली फिल्‍म 'यारियां'

कॉलेज में प्ले चल रहा है. सीन है भारत पाकिस्तान के युद्ध का. भारतीय सैनिक गोलियों से छलनी हो गया है. आखिरी वक्त में वह पुकार रहा है...मां. बैकस्टेज में जिस एक्ट्रेस को मां (भारत मां) बनकर आना है, वह अपने ब्‍वायफ्रेंड को किस करने में बिजी है. बेहद कम कपड़ों में एक और गर्ल, जो कि मेकअप आर्टिस्ट है, कुछ हवस की आग में झुलसे थिएटर आर्टिस्ट के गालों पर ब्रश रगड़ते हुए उनके बाप की कार के बारे में पूछ रही है. डायरेक्टर उसे ही मां का लिबास पहना भेज देता है. मगर एंट्री से पहले उसकी साड़ी फंस जाती है. और स्टेज के बीच में पहुंचने तक ये पूरी खुल जाती है.

तो मां स्टेज पर पहुंचती है, मगर तंग टॉप और हॉट पैंट्स में. देश पर मरने को आतुर जवान की लालसा जाग जाती है. वह जबरन मां के सीने से लगना चाहता है, जो कि एक मौके की तरह सामने आता है. जवान कहता है. मां कोई लोरी सुना दो. मां खड़ी हो जाती है और माई नेम इज शीला पर नाचने लगती है... सब सिपाही नाचने लगते हैं. सामने सेक्सी सायरन लिबास में बैठी एक टीचर भी इसे देखकर एक बमभोले टाइप प्रोफेसर पांडे के साथ चेप होने लगती है.

हंसी तो बहुत आ रही होगी आपको इस सीन के बारे में पढ़कर. क्या कहा. ये भद्दी कॉमेडी है. तो फिर झेलो एक और बयाना. तमाम मुश्किलों को दूर करता हुआ हाथ में तिरंगा लिए नायक विदेशी झंडा लिए बदमाश फिरंगी को पछाड़ता है. और कॉलेज के सबसे ऊंचे शिखर पर अपने मुल्क की आन बान शान को लहरा देता है. फिर ओम शांति ओम के सुपरमैन ऊड़ी बाबा की तर्ज पर लगभग तैरता हुआ फर्श पर आ जाता है. नीचे दो मां खड़ी हैं, जिनकी आंखों में आंसू और चेहरे पर फख्र है. वाऊ कितना पैट्रियॉटिक सीन है न.

ठोको ताली. फिल्म नहीं हमारे लिए क्योंकि आपको इस तरह के टॉर्चर से बचाने के लिए हम फिल्म समीक्षक पूरी गंभीरता से फिल्म देखकर आए हैं. और नतीजा ये निकाला है कि यारियां को पांच में आधा स्टार दिया जाए. इतना मैं सबको देता हूं, उस मेहनत के लिए जो कैसी भी फिल्म बनाने में खर्च होती है. सितारों के आगे बढ़ें तो सच ये है कि यारियां बेहद वाहियात फिल्म है. इसके किरदार इतने नकली हैं, कि लगता है कि जैसे जादू के ग्रह से सीधे यहां गिरे हैं और उन्हें जल्दी जल्दी में कोई विस्तार से बता नहीं पाया कि भारत में नौजवान लड़के लड़कियां कैसे होते हैं, कैसे बात करते हैं. कैसे रिएक्ट करते हैं. एक्टिंग का जिम्मा बस दो मां के हवाले कर दिया गया है. ये ऊपर वाली हॉट पैंट मां नहीं, स्मिता जयकर और दीप्ति नवल जैसी एक्ट्रेस मां हैं. मगर अफसोस कि उन्हें भी बेरहमी से खर्च होना पड़ा.

कहानी तो नहीं है फिल्म में. ओह नहीं शायद है. ओह हां, बहुत सारी कहानियों के पैबंद से बना एक टाट है. देखो तो जरा क्या क्या है इसमें. सिक्किम के एक कॉलेज में पांच नौजवान हैं. लड़कों का बस एक ही अरमान है गर्ल्स हॉस्टल में जाना और किस करना. माइंड इट, किस करने के लिए जाने से पहले हीरो अपनी मासी और गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन से परमिशन भी लेता है.

खैर, मुश्किल ये है कि कॉलेज पर आई है आफत, एक बदमाश ऑस्ट्रेलियन उसकी जमीन पर कैसीनो बनाना चाहता है. पर एक रास्ता है. अगर हिंदुस्तानी कॉलेज के लड़के ऑस्ट्रेलिया वालों को पांच मुकाबलों में हरा दें. अब ये मुकाबले हैं, बीच में बीच (अंग्रेजी वाला) पार्टी है, प्यार है, इनकार है, इकरार है, इसरार है. बिकनी है, बेवफाई है...उफ जहांपनाह क्या क्या नहीं है इस कयामत फिल्म में.

चार्लीज एंजेल्स में दिखाए गए बाइक स्टंट्स हैं. मिशन इम्पॉसिबल-2 की तरह बिना रस्सी के रॉक क्लाइंबिंग करते लोग हैं. ऑस्ट्रेलिया के नस्लवादी हमले हैं. थ्री इडियट्स की तरह टावर पर बैठकर यारों का शराब पीना है. बारिश में भीगते हुए भुट्टे खाना, एमएमएस बनाना, गर्ल्स हॉस्टल की ऑल पिंक पाजामा पार्टी, यार का मरना, मां का गिरना. शहीद ब्रिगेडियर बाप की बेइज्जती करना और आखिरी में मुल्क के लिए सुपरहीरो बनना.माफ कीजिए, मैं शायद भावुक हो गया. क्या करूं फिल्म में है ही इतना कुछ.

अमूमन मैं रिव्यू के उत्तरार्ध में बताता हूं कि एक्टिंग कैसी है. पर बच गए इस बार. एक्टिंग है ही नहीं, तो क्या झूठ मूठ का बताना. पर संत कह गए हैं, सार सार को गह रहे, थोथा देई उड़ाय. तो अच्छी बात करते हैं. गंदी बात छोड़कर.

फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. ऑडियो पर सुनेंगे तो और ज्यादा अच्छा लगेगा. टी सीरीज की वैसी भी एक लीगेसी रही है आशिकी के दिनों से कर्णप्रिय संगीत देने की. लोकेशन भी कुछ अच्छी हैं. कैमरे पर भी काफी खर्चा हुआ होगा. हेलिकॉप्टर से सीन लेना सस्ता तो होता नहीं, फिल्म भले ही कितनी भी हवा हवाई क्यों न हो.

और अंत में प्रार्थना. वैसे तो ये चार शब्द नामचीन हिंदी साहित्यकार उदय प्रकाश की एक कहानी का शीर्षक हैं पर यहां आपके लिए एक मंत्र की तरह काम आएंगे. अगर बहकावे में, किसी के जबरदस्ती करने पर आप यारियां के दुश्चक्र में फंसने जा ही रहे हैं तो. यारियां देखकर कुछ यारियां टूट जाएं. ये फिल्म दिखाने क्यों लाया कहकर, तो कम अज कम हमें दोष न दीजिएगा. हमने भी तो हीरो की तरह तिरंगे वाले अपने मुल्क के वासियों के वास्ते कर्तव्य निभा दिया आपको सब सच बताकर. तो फिर गाओ सब मिलकर, आज दिन है सनी सनी.

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Source: aajtak.intoday.in

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