भारत-पाक परमाणु युद्ध से दो अरब लोगों के जीवन को खतरा

10 December, 2013 12:11 PM

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एक अध्ययन ने इस संबंध में चेतावनी दी है.

इंटरनेशनल फीजिशियंस फॉर द प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वार (आईपीपीएनडब्ल्यू) के सह अध्यक्ष एरा हेलफांद ने कहा कि परमाणु युद्ध करने से वैश्विक स्तर पर उससे भी कहीं अधिक संख्या में लोगों की मौत होगी जो हमने पहले सोचा था.

इससे पहले 2012 में किए गए अध्ययन में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आईपीपीएनडब्ल्यू और फिजिशियंस फॉर सोशल रिस्पांसिबिलिटी ने कहा था कि परमाणु हमले से पैदा अकाल के कारण एक अरब से अधिक लोगों की मौत हो सकती है.

‘परमाणु अकाल: दो अरब लोगों को खतरा?’ नामक यह नया अध्ययन उन पर्यावरण वैज्ञानिकों की ओर से प्रकाशित अनुसंधान पर आधारित है जिन्होंने पृथ्वी के वातावरण और अन्य पारिस्थितिक तंत्र पर परमाणु विस्फोटों के प्रभाव का मूल्यांकन किया है.

अध्ययन के अनुसार विश्व में कहीं भी 100 हथियारों का इस्तेमाल करके किया गया परमाणु युद्ध वैश्विक पर्यावरण और कृषि उत्पादन पर इतना बुरा प्रभाव डालेगा कि दो अरब से ज्यादा लोगों का जीवन संकट में पड़ जाएगा.

हेलफांद ने कहा कि विकासशील दुनिया में एक अरब लोगों की मौत निश्चित ही मानव इतिहास की भयंकर तबाही होगी और यदि इस आशंका में चीन के एक अरब 30 करोड़ लोगों के जीवन को खतरा भी जोड़ लिया जाए तो हम स्पष्ट रूप से ही ऐसी स्थिति में प्रवेश कर रहे हैं जहां सभ्यता का अंत हो जाएगा.

अध्ययन में इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 से अब तक तीन बार युद्ध हुआ है.

लेखक ने साथ ही कहा कि किसी भी प्रकार के सीमित परमाणु युद्ध से पृथ्वी पर ऐसा ही प्रभाव पड़ेगा. आधुनिक परमाणु हथियार उन अमेरिकी बमों से कहीं अधिक शक्तिशाली हैं जिन्होंने 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी में दो लाख लोगों की जान ली थी.

हेलफांद ने कहा कि विश्व भर में जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं और जिन देशों के पास ये हथियार नहीं हैं उन्हें परमाणु युद्ध के खतरों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और इसके लिए हमें परमाणु हथियारों को नष्ट करना चाहिए.

Source: samaylive.com

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