मूवी रिव्यू: शानदार एक्शन वाली फिल्म है 'बैंग-बैंग'

2 October, 2014 8:16 AM

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हॉलीवुड फिल्म 'नाइट एंड डे' अपने आप में एक बेहद साधारण एक्शन फिल्म थी. उस साधारण फिल्म की रीमेक बैंग-बैंग को ऋतिक रोशन की फिल्म धूम-2 का एक्सटेंशन कहा जा सकता है या फिर कह सकते हैं कि बिना मास्क के कृष आ गया है. बॉलीवुड के हिसाब से देखें तो एक्शन सीन्स ज़ोरदार हैं और मज़ेदार भी. बस छोटी सी शर्त है कि एक बार फिर से दिमाग़ घर छोड़कर आइएगा.

राजवीर (ऋतिक रोशन) के पास कोहिनूर हीरा और उसके पीछे हैं बहुत सारे लोग. अजीबोग़रीब एक्शन सीन करके वो पीछे पड़े लोगों से बच निकलता है. इसी दौरान उसकी मुलाक़ात एक बैंक रिसेप्शनिस्ट हरलीन साहनी (कटरीना कैफ़) से होती है. हरलीन राजवीर पर फ़िदा हो जाती है. लेकिन वो जब जब राजवीर से मिलती है, कोई ना कोई खतरनाक हमला हो जाता है. राजवीर उसे बार-बार नशा देकर, बेहोशी की हालत में अपने साथ कभी शिमला, कभी अबु धाबी और कभी प्राग ले जाता है. हर जगह कुछ रोमांटिक सीन्स और गानों के साथ-साथ एक्शन सीन होते हैं. अंत में सस्पेंस खुलता है और आप हंसते-मुस्कुराते थिएटर से बाहर आ जाते हैं. फिल्म में ये सारी घटनाएं क्यों घटीं, आप सोचते नहीं क्योंकि आप तो दिमाग़ घर पर छोड़कर आए हैं.

फिल्म का स्क्रीनप्ले तीन बढ़िया लेखकों सुजॉय घोष (फिल्म कहानी), अब्बास टायरवाला और सुरेश नायर का है और इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत इसकी रफ़्तार है. फिल्म के कुछ डायलॉग अच्छे हैं. हालांकि कोई भी सीन 'लॉजिक' को छूकर नहीं गुज़रता लेकन दर्शक तालियां बजाते रहते हैं. ऋतिक-कटरीना के रोमांटिक सीन भी उनकी पिछली फिल्म 'ज़िदगी मिलेगी ना दोबारा' की सीधी नक़ल लगते हैं. वहीं ज़िंदगी खुल कर जीने की बकबक. अक्सर बॉलीवुड की किसी भी बेतरतीब फिल्म को बड़े सितारे और बढ़िया फाइट सीक्वेंस संभाल लेते है. बैंग बैग के फाइट सीक्वेंस हॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'The Amazing Spiderman' के एक्शन डायरेक्टर एंडी आर्मस्ट्रॉन्ग ने निर्देशित किए है और यही सीन फिल्म की जान हैं.

ऋतिक बहुत मज़े से ये रोल निभा जाते हैं. हमेशा की तरह कटरीना की खराब हिंदी छुपाने के लिए उनके किरदार को कनाडा का बता दिया गया है. पता नहीं ऐसा कब तक होता रहेगा. डैनी को देखकर अच्छा लगेगा हालांकि उनकी प्रतिभा के हिसाब से उनका रोल नहीं लखा गया है. फिल्म में जावेद जाफ़री और पवन मल्होत्रा के भी ठीक-ठाक रोल हैं. विशाल-शेखर ने अपनी म्यूज़िक फैक्ट्री से दो अच्छे गीत recycle किए हैं- 'तू मेरी' और 'मेहरबान'. ये गीत बढ़िया तो हैं लेकिन आप सोचेंगे कि इस फिल्म में इन गीतों का क्या काम? मगर फिर...आप सोचेंगे ही क्यों? आप तो दिमाग़ घर छोड़कर आए हैं.

निर्देशक सिद्धार्थ आनंद इससे पहले तारा-रम-पम और अंजाना अंजानी जैसी अच्छे सब्जेक्ट वाली बेहद खराब फिल्में बना चुके हैं. यहां उनके पास पहले से ही एक बनी-बनाई फिल्म (ऩाइट एंड डे) मौजूद थी. वो उससे बेहतर कुछ बना सकते थे मगर ऐसी कोई कोशिश उन्होंने नहीं की है.

अब वीकेंड पर मनोरंजन ही चाहिए ना, सोचकर क्या करना है? तो बैंग-बैंग का मज़ा लीजिए. एक बार फिर याद दिला दूं, दिमाग़ घर छोड़कर आइएगा.

Source: abpnews.abplive.in

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