मूवी रिव्यू: 'सिंघम रिटर्न्स' में कुछ भी नया देखने को नहीं मिलेगा

15 August, 2014 8:15 AM

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सुपरमैन, आयरनमैन, हीमैन, चाचा चौधरी और चुलबुल पांडे जैसे सुपर हीरो को मिक्सर-ग्राइंडर में डालकर कुछ देर के लिए स्विच ऑन कीजिए तो थोड़ी देर में जो बाहर आएगा उसका नाम बाजीराव सिंघम होगा. रोहित शेट्टी की सिंघम रिटर्न्स यही साबित करती है कि कॉमिक बुक हीरो को देखने की तमन्ना ना दर्शकों में कम हुई है, ना ऐसे रोल निभाने की ख्वाहिश हमारे स्टार्स की ख़त्म हुई है. यहां ये कहना ज़रूरी है कि रोहित शेट्टी की फिल्म में स्टार कोई भी हो हीरो रोहित शेट्टी ही होते हैं जो घिसी-पिटी कहानी और स्क्रिप्ट के बावजूद लगातार दर्शकों की तालियां और 100 करोड़ की फिल्में हासिल करते हैं.

इस बार आईपीएस अफसर बाजीराव सिंघम (अजय देवगन) मुंबई पहुंच गए हैं जहां उनका सामना भ्रष्ट नेता प्रकाश राव (जाकिर हुसैन) और खुद को आध्यात्मिक गुरू कहने वाले सत्य बाबा (अमोल गुप्ते) से है. ये दोनों सिंघम की मौजूदगी में ईमानदार नेता गुरुजी (अनुपम खेर) की हत्या करवाते हैं. ये हर बार कानून को धोखा देते हुए बच निकलते हैं. फिल्म के क्लाईमैक्स में सिंघम समेत मुंबई पुलिस के 47 हज़ार सिपाही वर्दी उतारकर, बनियान पहने बाबा और प्रकाश राव पर धावा बोल देते हैं. इसके बाद बड़ी चालाकी से सिंघम कानून हाथ में लेकर दोनों को खत्म कर देता है. इस मारधाड़ के बीच सिंघम और अवनी (करीना कपूर) का रोमांस भी चलता रहता है.

फिल्म के कई सीन आपको टीवी सीरियल सीआईडी की याद भी दिलाएंगे. सिंघम के साथी अफ़सर के रूप में यहा सीरियल के ‘दया’ भी हैं और फिल्म के क्लाईमैक्स में वो दरवाज़ा भी तोड़ते हैं.

रोहित शेट्टी काफी हद तक निर्देशक मनमोहन देसाई की डगर पर चल रहे हैं. इनकी फिल्मों में भी कई सीन्स का कोई लॉजिक नहीं होता लेकिन दर्शक ताली बजाते रहते हैं. फिल्म के आख़िरी सीन में पूरी मुंबई पुलिस फोर्स बनियान पहने में सड़कों पर उतर आती हैं. सोच कर देखिए तो ये सीन बेहद हास्यास्पद लगेगा, लेकिन दर्शक गंभीरता से इसे एकटक देखते रहते हैं. ये रोहित शेट्टी ही कर सकते हैं. अगर आपके लिए एंटरटेनमेंट का मतलब ऐसे सीन्स हैं तो सिंघम रिटर्न्स देख आइए.

Source: abpnews.abplive.in

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