मूवी रिव्यू: सिरदर्द का नया नाम 'क्रीचर 3D'

12 September, 2014 6:39 PM

16 0

दुनियाभर के लोग जुरासिक पार्क, हल्क या ऐनाकोन्डा जैसी हॉलीवुड की फिल्में सालों पहले देख चुके हैं. अपने समय में ये फिल्में कहानी के साथ साथ तकनीकी रूप से बेहद मज़बूत थी और कहानी में भी नयापन था. यही इन फिल्मों के सफल होने की वजह भी थी. इन्हीं कामयाब फिल्मों के साथ-साथ निर्देशक विक्रम भट्ट नें रामसे ब्रदर्स की सी-ग्रेड फिल्मों के सीन मिला कर क्रीचर 3डी बनाई है जो बेहद हास्यास्पद और बकवास है. अगर आप अंत तक इस फिल्म को देख पाए तो सिरदर्द गारंटीड है.

फिर भी दो लाइन में कहानी पर भी बात कर लेते हैं. हो सकता है आप इसमें कुछ नयापन तलाश कर सकें. अहाना (बिपाशा) ने मुंबई से हिमाचल प्रदेश के कस्बे में आकर एक बुटीक होटल खोला है. क्रिसमस पर इस होटल का लॉन्च फंक्शन है लेकिन उसी समय एक बड़ा छिपकलीनुमा क्रीचर एक एक करके होटल में मौजूद लोगों की हत्या करना शुरू कर देता है. फिर किसी बेफ़कूफी भरी रिसर्च से पता चलता है कि ये जानवर दरअसल ब्रहमराक्षस है. पूरी फिल्म में लोग बेतहाशा चीखते रहते हैं और अंत में किसी तरह सबको ब्रहमराक्षस से मुक्ति मिलती है और दर्शकों को इस सिरदर्द से.

बिपाशा बासु पिछले कुछ महीनों से फिल्म 'हमशकल्स' की आलोचना में लगी थीं. उनकी ये फिल्म किसी भी मायने में 'हमशकल्स' से बेहतर नहीं है. साल की बुरी फिल्मों में ये दोनों ही फिल्में पहले पायदान के लिए मुक़ाबला पर हैं. शायद अब बिपाशा को बड़ी फिल्मों में काम नहीं मिलता इसीलिए उन्होंने अपना ध्यान ऐसी सस्ती हॉरर फिल्मों पर लगाया है. 'राज़ 3' के साथ उनका ये दांव कामयाब भी हुआ था. लेकिन ये फिल्म बेहद कमज़ोर है. उनके हीरो पाकिस्तानी अभिनेता इमरान अब्बास है जो फिल्म में उनसे भी ज़्यादा डरे हुए नज़र आते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत ज़्यादा लाउड है और वास्तव में कई सीन पर आप खुद से सवाल पूछेंगे कि आप अब तक थिएटर में क्यों बैठे हैं?

सबसे ज़्यादा चर्चा स्पेशल इफ़ेक्ट्स से बनाए हुए क्रीचर की थी. लेकिन उसे देखकर किसी को डर नहीं लगता. फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत वही था लेकिन देखने में बहुत साधारण लगता है. फिल्म के कई सीन फिल्म के बजाय किसी टेलीविजन के फैंटेसी सीरियल जैसे लगते हैं. फिल्म की 3डी भी बहुत मामूली है. निर्देशक विक्र्म भट्ट ने किसी ज़माने में आमिर ख़ान को लेकर फिल्म ग़ुलाम बनाई थी. क्रीचर 3डी के सामने वो फिल्म भी ‘महान सिनेमा’ जैसी लगती है. यहां विक्रम भूल गए हैं कि दर्शकों तक अब हॉलीवुड की फिल्में आराम से पहुंचती हैं. उनकी नक़ल पर उनसे कमज़ोर कुछ भी बनाना मूर्खता है.

अगर आप इस वीकेंड पर ख़ुद को सज़ा देना चाहते हैं तो ये फिल्म ज़रूर देख आएं. अगर कुछ अच्छे पल बिताने हैं तो इसी हफ़्ते रिलीज़ हुई फ़ाइंडिंग फ़ैनी देख सकते हैं.

Source: abpnews.abplive.in

To category page

Loading...