लंबे इंतज़ार के बाद ईरान से हुआ परमाणु करार

24 November, 2013 3:52 AM

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लंबे इंतज़ार के बाद ईरान से हुआ परमाणु करार

दुनिया के छह शक्तिशाली देशों और ईरान के बीच तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर चल रही वार्ता के बाद आख़िरकार समझौता हो गया है.

पिछले पांच दिनों की वार्ता के बाद इन देशों के विदेश मंत्रियों ने इस समझौते की पुष्टि की है. हालांकि इस समझौते से जुड़ा कोई ब्योरा जारी नहीं किया गया है.

उम्मीद जताई जा रही है कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा इस समझौते से जुड़ा बयान जल्द ही दे सकते हैं.

इस वार्ता का मकसद छह महीने तक के लिए अंतरिम सहमति बनाना था ताकि सभी पक्षों को समग्र निपटारे की बातचीत के लिए वक्त मिल सके.

रूस, अमरीका, फ़्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी की यह मांग थी कि तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रमों को बंद करे ताकि इसके बदले उस पर लगे प्रतिबंधों में रियायत दी जा सके.

हालांकि पहले ईरान ने कहा था कि वह किसी भी समझौते में अपने यूरेनियम 'संवर्धन के अधिकार' को नहीं छोड़ेगा.

ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ़ ने ट्विटर पर यह घोषणा की है, "हमने समझौता कर लिया." फ्रांस के विदेश मंत्री लौरा फेबियस ने भी इस समझौते की पुष्टि की है.

इस वार्ता की अगुवाई करने वाली यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख कैथरीन एस्टन के प्रवक्ता ने उनका हवाला देते हुए कहा, "ई3+3 और ईरान के बीच समझौता हो चुका है."

शनिवार शाम ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा था कि मसौदे के 98 फीसदी पर सहमति बन चुकी है लेकिन तेहरान किसी भी समझौते में अपने संवर्धन के अधिकार का उल्लेख चाहता है.

ईरानी वार्ताकारों ने कहा था कि दोनों पक्षों ने प्रगति की है. वहीं दूसरी ओर कुछ अमरीकी नीति निर्माताओं ने कहा था कि अगर वार्ता असफल होती है तो ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जाएंगे.

ईरान हमेशा से कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है लेकिन कुछ वैश्विक शक्तियों को संदेह है कि वह परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित करना चाह रहा है.

वार्ताकार बुधवार से ही किसी ऐसे नतीजे तक पहुंचने के लिए बातचीत कर रहे थे जो ईरान के साथ ही पी5+1 को स्वीकार हो. पी5+1 में अमरीका, रूस, चीन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल हैं.

अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी और ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग भी इस वार्ता में शामिल होने के लिए जिनेवा पहुंचे.

अन्य पश्चिमी देशों के मुकाबले फ़्रांस ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख अपनाया था और फ्रांस ने लगातार अपने साथी वार्ताकारों को ज़्यादा समझौता नहीं करने के लिए कहा.

कैथरीन ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जाफरी से संक्षिप्त मुलाकात की थी और इस मुलाकात को ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने "जटिल और मुश्किल" बताया है.

Source: bbc.co.uk

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