Movie Review: कल्पना को पंख लगाकर गढ़ी गई फिल्म है क्रीचर 3डी

12 September, 2014 9:58 AM

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Movie Review: कल्पना को पंख लगाकर गढ़ी गई फिल्म है क्रीचर 3डी

क्रीचर 3डी के बारे में बिपाशा बसु और डायरेक्टर विक्रम भट्ट पहले ही कह चुके हैं कि यह हॉरर मूवी नहीं बल्कि क्रीचर बेस्ड है. फिल्म में कुछ ऐसा ही दिखाने की कोशिश की गई है. यह कुछ-कुछ भारतीय परंपरा और कल्पना को पंख लगाकर गढ़ी गई फिल्म है. जिसमें हल्का-सा हॉरर का पुट डाल दिया गया है. विक्रम भट्ट अपनी पिछली कुछ फिल्मों से 3डी फॉर्मेट को ट्राई कर रहे हैं, और सफल भी रहे हैं. ऐसी ही कोशिश क्रीचर में भी है. अगर फिल्म की लंबाई कुछ कम कर दी होती और कहानी थोड़ी और तर्कसंगत होती तो यह धमाकेदार फिल्म बन सकती थी. लेकिन बिपाशा बसु की एक्टिंग और टेक्नोलॉजी की वजह से फिल्म कहीं-कहीं अच्छी लगती है. वैसे भी इस तरह की हिम्मत करके विक्रम ने एक नए ट्रेंड की शुरुआत तो कर ही दी है.

कहानी में कितना दमफिल्म को हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में शूट किया गया है. अहाना (बिपाशा) हिमाचल में जंगल के बीचोंबीच में एक लॉज खोलती हैं. लोग भी खूब आते हैं, लेकिन तभी एक ब्रह्मराक्षस इन जंगलों में आ जाता है, और अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार करने लगता है. ब्रह्मराक्षस के निशाने पर अहाना का लॉज भी आ जाता है. फिर कहानी शुरू होती है अहाना के अपने अस्तित्व को बचाने और ब्रह्मराक्षस से लड़ने की. अकसर भारतीय डायरेक्टरों की कमजोरी रही है कि वे जिस विषय को उठाते हैं, उस पर वह शुरू से लेकर आखिर तक कायम नहीं रह पाते. लय टूट जाती है. रोमांस और न जाने-जाने क्या-क्या बातें डालने के चक्कर में फिल्म को लचर कर देते हैं. ऐसा विक्रम के साथ भी हुआ. उन्हें बिपाशा और क्रीचर का मुकाबला कुछ ज्यादा दिखाना चाहिए था. कहानी को और दिलचस्प बनाया जा सकता था.

स्टार अपीलबिपाशा को तो अब बॉलीवुड में हॉरर क्वीन के नाम से पहचाने जाने लगा है. पिछले कुछ समय से वे ऐसी ही फिल्में कर रही हैं, जो बॉलीवुड की अन्य हीरोइनें शायद हाथ भी नहीं डालना चाहे. बिपाशा ने इस तरह के फैसलों से अपनी बोल्डनेस का तो इजहार कर दिया है, और इस तरह की फिल्मों में महारत भी हासिल कर ली है. फिल्म में उनके सीन्स में खूब मजा आता है. उनके चेहरे पर आने वाले एक्सप्रेशंस भी मजेदार हैं. हालांकि इमरान के साथ उनकी कैमिस्ट्री जमती नहीं है. मुकुल देव मजेदार और दिलचस्प हैं.

कमाई की बातएक ऐसा दर्शक वर्ग भी है जो इस तरह की फिल्मों को देखते हुए ज्यादा तर्कों में नहीं उलझता है और वह परदे पर होने वाली हर घटना का मजा लेने में यकीन करता है. फिल्म के एक दो गाने भी अच्छे हैं. फिल्म को देखने मासेज ही आने वाली है और इसमें इसी तरह का मसाला भी है. क्रीचर ऐसी फिल्म है जो छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटरों के लिए बनी है. वैसे भी वीमन लीड वाली फिल्मों को पसंद किया जा रहा है. पिछले चार हफ्तों में मर्दानी और मेरी कौम के बाद यह तीसरी फिल्म है जो हीरोइन बेस्ड है. अब बारी बिपाशा की है!

Source: aajtak.intoday.in

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